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बस थोड़ा सी को‍शिश

थोड़ी सी को‍शिश करने की अ‍हमियत और सफलता के साथ ऐसा करने को अक्‍सर ज्‍यादा महत्‍व नहीं मिलता है


एक दिन मैं फिटनेस ऐप के साथ किसी के अनुभव के बारे में एक ब्‍लॉग पोस्‍ट पढ़ रहा था। ब्‍लॉग के लेखक ने यह ऐप इंस्‍टॉल किया फिर एक लक्ष्‍य तय किया कि वह कितनी एक्‍सरसाइज एक दिन में करेगा। कुछ दिन के बाद उसने गौर किया कि अगर वह लक्ष्‍य के अनुरूप एक्‍सरसाइज रिकॉर्ड नहीं करता है तो ऐप उसे कम एक्‍सरसाइज रेकॉर्ड करने की पेशकश करता है।

उसने आधे घंटे की एक्‍सरसाइज मिस की तो ऐप से उसे मैसेज आता है और इसमें पूछा जाता है कि क्‍या वह पांच मिनट या 10 मिनट या इससे भी कम एक्‍सरसाइज करना पसंद करेगा। उस समय लेखक को निराशा हुई।

उसने महसूस किया कि ऐप उसके लिए यह स्‍वीकार करना आसान बनाना चाहता है कि वह कम से कम कुछ मिनट एक्‍सरसाइज करेगा। लेखक ऐप के साथ बना रहा। फिर उसने यह माना कि कुछ मिनट एक्‍सरसाइज करना भी अहम है। कम से कम उसने योगा मैट निकाला और कुछ किया भले ही यह तीन चार मिनट ही था। हो सकता है कि इससे उसकी फिटनेस पर कोई फर्क न पड़ा हो लेकिन एक्‍सरसाइज की आदत मजबूत होना शुरू हो गई।

बचत और निवेश की दुनिया में भी मैं ऐसा ही कुछ देखता हूं। लोग बचत शुरू करने के बारे में सोचते हैं और सबसे पहले ऑनलाइन गोल कैलकुलेटर पर जाकर यह पता लगाने का प्रयास करते हैं कि उनको किसी भविष्‍य की जरूरत के लिए कितना बचत करने की जरूरत है। और अक्‍सर यह रकम उससे बहुत ज्‍यादा होती है जितना वे बचत कर सकते हैं लेकिन जोश में वे खुद को मुश्किल मंथली गोल में डाल देते हैं। वे एक बड़ी एसआईपी शुरू करते हैं। कुछ माह बाद वे पाते हैं कि वे एसआईपी की रकम जमा नहीं कर सकते हैं और फिर वे एसआईपी में निवेश नहीं करते हैं। इस तरह से उनका निवेश शून्‍य हो जाता है।

इसका समाधान भी फिटनेस ऐप जैसा ही है। शुरूआत में आप थोड़ी बचत करें जितना आप आसानी से कर सकते हैं। आप ऑनलाइन कैलकुलेटर पा जाकर यह यह न देखें कि चार कमरों का अपार्टमेंट खरीदने के लिए पांच साल में आपको कितना बचत करने की जरूरत है। इसके बजाए आपको उतनी बचत से शुरूआत करनी चाहिए जितनी बचत आप कर सकते हैं। अगर आप कुछ हजार रुपए बचा सकते हैं तब भी यह ठीक है। अगर आप एक हजार रुपए बचा सकते हैं तो यह भी ठीक है। यह दो मिनट एक्‍सरसाइज करने के बराबर है। यह बचत की आदत को मजबूत बनाएगा। सबसे अहम बात बचत शुरू करना है।

मैंने देखा कि एसआईपी के जरिए नियमित तौर पर निवेश करने की गणित अहम है। लेकिन एसआईपी के जरिए बचत करने की आदत लोगों को निवेश जारी रखने के लिए प्रेरित करती है। यह एक मनोवैज्ञानिक फैक्‍टर है जो बेहर रिटर्न और सफलता के लिए निवेश जारी रखने पर जोर देता है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि निवेश में सबसे बड़ी समस्‍या यह नहीं है कि कहां निवेश करें। इसके बजाए सबसे अहम बात हमेशा निवेश करना है और अच्‍छे और बुरे दोनों समय में निवेश जारी रखना है। लोग कभी कभी निवेश करते हैं और फिर जब उनके पास रकम नहीं बचती है या जब बाजार गिरता है तो वे निवेश बंद कर देते हैं। एसआईपी इस मोर्चे पर मदद करती है क्‍योंकि इसके जरिए निवेश एक आदत बन जाती है। यह आपके व्‍यवहार में बस जाती है। यह हर माह अपने आप होता है और आपको हर माह निवेश करने के लिए अलग से कोई प्रयास नहीं करना पड़ता है। अगर आप ऐसी रकम से निवेश की शुरूआत करते हैं जो आप आसानी से बचा पाते हैं तो इससे मदद मिलती है।

सबसे अहम बात यह है कि कोई ऐसा माह नहीं होना चाहिए जिसमें आपने बचत न की हो। निश्चित तौर पर हमेशा के लिए छोटी रकम निवेश करते रहने से भी कोई खास फायदा नहीं होने वाला। हालांकि हमने देखा है कि समय के साथ निवेश की रकम में इजाफा अपने आप होता है। छोटी छोटी रकम इकठ्ठा होती है मुनाफा दिखता है और इसके बाद आपको यह देख कर अच्‍छा महसूस होता है कि आपकी रकम बढ़ रही है। जल्‍द ही एक या दो साल बीत जाते हैं और आपकी इनकम भी बढ़ती जाती है। यह ऐसा समय होता है जब निवेशक को लगता है कि उन्‍होंने बिना किसी समस्‍या के ज्‍यादा रकम निवेश करनी शुरू कर दी है।

मैं सोचता हूं कि क्‍या म्‍युचुअल फंड को भी ऐसा सहूलियत देनी चाहिए जैसा फिटनेस ऐप ने किया। अभी चाहे आप सीधे फंड के जरिए निवेश कर रहे हैं या थर्ड पार्टी ऐप के जरिए एसआईपी किश्‍त मिस होने के बारे में कोई चिंता नहीं करता है। अगर कोई मैसेज आए और छोटी रकम निवेश करने की पेशकश करें तो यह तरीका भी काम कर सकता है।


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