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कुछ न करो

बहुत से लोग आपको इसके उलट प्रयास करने की सलाह देंगे लेकिन निवेश की दुनिया में ज्‍यादातर गतिविधियां वास्‍तव में कुछ न करना है

एक दिन मैंने नासिम निकोलस तालेब का ट्वीट देखा। ट्वीट में वे छुट्टियों के बारे में बात कर रहे हैं। छुट्टियां मनाने के लिए रिजॉर्ट न जाएं जहां आपको काफी कुछ हासिल कर चुके लोग मिलेंगे। इसके बजाए अपने गांव जाएं और स्‍थानीय लोगों से बातचीत करें जहां वे आपको सिखाएंगे कि जब करने के लिए कुछ न हो तो आप कैसे कुछ न करें।


इस बात में कोई शक नहीं कि लोगों की छुट्टियों के बारे में यह बात सच है। लेकिन इसका सबसे दिलचस्‍प हिस्‍सा निवेशकों के लिए कहीं ज्‍यादा प्रासांगिक है। यह एक मुहावरा है कि जब करने के लिए कुछ न हो तो कैसे कुछ न करें।

कुछ न करना ऐसी गतिविधि है जो आम तौर पर किसी चीज में सफलता से नहीं जुड़ी है। वास्‍तव में यह असफलता और आलसीपन से जुड़ी है। जीवन की ज्‍यादातर चीजों के लिए यह शायद सच हो सकता है लेकिन निवेश के लिए नहीं। यह कर्मचारियों के लिए, छात्रों के लिए, खिलाडियों के लिए, राजनीतिज्ञों के लिए और निश्चित तौर पर भारत में सड़कों पर ड्राइव करते हुए सच है। ऐसे में हम यह मान लेते हैं कि यह बचत और निवेश के लिए भी सही होगा।

सोच कर देखिए कि निवेश के साथ कौन सी गतिविधियां सामान्‍य तौर पर जुड़ी होनी चाहिए ? मेरा मानना है कि ज्‍यादातर लोग सोचेंगे कि निवेश की गतिविधियों में निवेश के बारे में पढ़ना, निवेश चुनना, इन पर नजर रखना, नए निवेश पर गौर करना, और पुराने निवेश बेचना शामिल है। यह गतिविधियां काफी अधिक हैं। अगर आपके पास 10 या 20 निवेश हैं तो यह गतिविधियां आपका पूरा समय ले सकती हैं। कई लोगों के पास 20 से भी अधिक निवेश हो सकता है।

निवेश के लिहाज से लगातार कुछ न कुछ करने का विचार सही विचार नहीं है। जब हम यह सोचते हैं कि निवेशकों को वास्‍तव में कौन सी गतिविधियां करनी चाहिए तो उनके लिए एक ही गतिविधि होनी चाहिए और वह कि कुछ नहीं करना चाहिए। ज्‍यादातर निवेश के समूचे जीवन काल में आपको इसके बारे में कुछ नहीं करना चाहिए। निवेश के बारे में ज्‍यादातर गतिविधि इंतजार करना है। महीनों और सालों तक इंतजार करते हुए निवेश को बढ़ते हुए देखना। और एसआईपी की किश्‍त हर माह जमा करते रहना।

समस्‍या यह है कि बहुत से लोग आपको इसके उलट प्रयास करने की दिशा में ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। निश्चित तौर पर उनकी आजीविका इस पर निर्भर है। निवेश के बारे में सलाह देने वाली इंडस्‍ट्री का बड़ा हिस्‍सा आपको यह समझाने में लगा है कि निवेश के लिए कुछ न कुछ करते रहना जरूरी है और जो निवेशक ज्‍यादा चीजें करेगा और वह उतना ही ज्‍यादा मुनाफा कमाएगा। लेकिन निवेश के लिहाज से यह सही नहीं है। और जो निवेशक इसको सही मानते हैं वे ऐसे समय कदम उठाते हैं जब उनको ऐसा नहीं करना चाहिए तो वे दूसरो की तुलना में बहुत खराब हालात में फंस जाते हैं। किसी ने कहा है कि निवेशक का बोरियत महसूस करना खतरनाक चीज है।

इस चीज को बढ़ावा देने के लिए इन्‍वेस्‍टमेंट एंटरटेनमेंट इंडस्‍ट्री भी जिम्‍मेदार है। इंडस्‍ट्री इन्‍वेस्‍टमेंट न्‍यूज माफिया की तरह व्‍यवहार करती है। वे ऐसा माहौल बनाने का प्रयास करते हैं कि कम अ‍वधि में होने वाली घटनाएं निवेशकों के लिए मायने रखती हैं। यह गलत बात है। मुझे निवेशकों से बहुत सारे मेल मिलते हैं जिसमें वे निवेश के बारे में सलाह मांगते हैं या निवेश से जुड़ी समस्‍या से बाहर निकलने का रास्‍ता पूछते हैं। समस्‍या हमेशा उन चीजों से पैदा होती जो निवेशक ने सालों और दशकों की अवधि में की हैं या नहीं की हैं। सिर्फ यही नहीं। सिर्फ यही नहीं इन मुद्दों के समाधान में हमेशा ऐसे कदम शामिल रहते हैं जो आने वाले सालों तक बने रहें। मुझे कभी किसी ने समस्‍या नहीं बताई जो इस बात से पैदा हुई हो कि उसने ब्रेकिंग न्‍यूज को देखकर कदम न उठाया हो। इसके बजाए इसका उलटा सही है। बहुत से निवेशक बहुत खराब प्रदर्शन इसलिए करते हैं क्‍योंकि वे खबरों बहुत ज्‍यादा गौर करते हें घटनाओं पर बहुत ज्‍यादा प्रतिक्रिया देते हैं।

आजकल हम जिस दौर में जी रहे हैं वह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। फरवरी 2020 के बाद से कोविड ने आपके निवेश पर असर डाला है। जिन निवेशकों ने इसके हिसाब से कदम उठाए उनको नुकसान हुआ। जब तब आपके निवेश में कोई बड़ी कमी न दिखे तब तक आपको कुछ खास करने की जरूरत नहीं है।

चार्ली मुंगेर ने पिछले साल यह बहुत बेहतर तरीके से किया है। 125 अरब डॉलर कैश रखने और असेट्स की कीमतें निचले स्‍तर पर होने के बावजूद बफेट और मुंगेर हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहे। वे किसी भी लालच में नहीं आए। मुंगेर ने कोविड के बारे में कहा कि यह अलग चीज है। हर कोई ऐसे बात कर रहा है जैसे उसे पता है कि क्‍या होने जा रहा है और कोई यह नहीं जानता है कि क्‍या होने जा रहा है।

ज्‍यादातर घटनाओं के लिए यह सही है।