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ली लू की निवेश पर राय

लू की एक चर्चित इन्वेस्टर टॉक पर आधारित

Timeless wisdom from Li Lu

ली लू हिमालया कैपिटल के संस्थापक और चेयरमैन हैं, और उन्हें चीन के वॉरेन बफ़ेट के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने ही चाइनीज़ बैटरी, और ऑटोमेकर बीवाईडी (BYD) कंपनी से चार्ली मंगर और वॉरेन बफ़ेट की पहचान कराई थी। ()

क्या आप सच में वैल्यू इन्वेस्टर हैं?
ली लू का तर्क है, कि वैल्यू इन्वेस्टिंग की ख़ासियत या मापदंड जाने पहचाने हैं, जैसे - सेफ़्टी का मार्जिन, और बिज़नस में निवेश के मायने बिज़नस का स्वामित्व होना, आदि। इसके अलावा वैल्यू इन्वेस्टिंग की दूसरी ख़ूबियां भी अच्छी तरह से जानी समझी जाती हैं, मगर वैल्यू इन्वेस्टिंग के तरीक़ों का पालन शायद ही कभी किया जाता है। क्यों? इसके लिए वो बताते हैं, "स्टॉक सबसे पहले और सबसे अहम कागज़ का टुकड़ा है, जिसके ज़रिए आप कभी भी ट्रेड कर सकते हैं, और इसीलिए, निवेश की सफलता इस बात में होती है कि आप सफलता से स्टॉक के दाम ऊपर या नीचे जाने का अनुमान लगा सकें। इसके लिए मार्केट का सम्मान करने की ज़रूरत है, क्योंकि मार्केट के ज़रिए ही आप ख़रीद और बेच सकते हैं।" उनका ये सिद्धांत सही भी है क्योंकि ज़्यादातर समय निवेशकों के स्टॉक ख़रीदने और बेचने का आधार होता है, स्टॉक के दाम का ऊपर और नीचे होना, न की कंपनी का बुनियादी प्रदर्शन।

बड़े दांव लगाइए और कम दांव लगाइए
क्या फ़ाइनेंशियल मार्केट कुशलता से काम करता है? ये सवाल सदियों पुराना है। यही बात ली लू भी मानते हैं, "आपको बस बहुत ज़्यादा सट्टेबाजी से बचना चाहिए, ये जानते हुए कि फ़ाइनेंशियल मार्केट वास्तव में बहुत बेहतर तरीक़े से काम नहीं करता है, मगर अक्सर, ये काफ़ी अच्छी तरह काम करता दिखाई देता है। इसलिए आप दांव लगाने के लिए, बड़े उतार-चढ़ाव वाली परिस्थितियों का इंतज़ार करना चाहते हैं।" यह देखना दिलचस्प है कि पिछले साल, 30 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट के बावजूद, सेंसेक्स एक साल से थोड़े ही ज़्यादा वक़्त में, तक़रीबन दोगुना हो गया है। और ये सब, COVID से हुए ख़राब आर्थिक असर के बीच हुआ है।

जीवन भर के लिए स्टॉक
बाजार की परिस्थितियां चाहे जो हों, आपको किस तरह के स्टॉक रखने चाहिए, और उन्हें कभी नहीं बेचना चाहिए? इसका जवाब ली लू कुछ इस तरह देते हैं, "अगर आप अपने एसेट या संपत्ति की क़ीमत, उसकी गुणवत्ता, और लगातार बढ़ती हुई नक़द आय पैदा करने की क्षमता को एक साथ ला सकते हैं, तो ये एक होली ग्रेल (वो पवित्र कप जो जीज़स क्राइस्ट ने लास्ट-सपर में इस्तेमाल किया) जैसा है, जिसे आप बहुत लंबे समय तक अपने पास रख सकते हैं।" ऐसे स्टॉक बहुत कम होते हैं, हालांकि, HDFC Bank, Asian Paints और कुछ दूसरी कंपनियां भारत में ऐसा करने में कामयाब रही हैं।
इतिहास से सीखते हुए
ली लू इस बात पर ज़ोर देते हैं कि वैल्यू इन्वेस्टिंग के बारे में जानने का सबसे अच्छा तरीक़ा इतिहास के बारे में जानना है, और उस समय के बारे में जानकारी हासिल करना है, जब बाज़ार किसी ख़ास सैक्टर में बहुत ऊंचाई पर पहुंच गया था। आपको ये देखना चाहिए कि ऐसी स्थिति में वो कौन सी कंपनियां थीं, जिन्होंने सुरक्षा का मार्जिन सबसे ज़्यादा दिया, और फिर भी वो अपने प्रदर्शन में सबसे बेहतर रहीं। ऐसी गतिविधियों से सीखा और पहचाना जा सकता है, कि आज कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे शेयर कौन से हैं।

सुरक्षा का कितना मार्जिन काफ़ी है?
अक्सर, हम किसी कंपनी के P/E, या P/B मल्टीपल को देखते हैं, और ये तय करते हैं कि इसका शेयर कम वैल्यू का है, या ओवरवैल्यूड है। हमारी सुरक्षा का मार्जिन इसी तरह के मापदंड को देखकर ही तय हो जाता है। हालांकि, ली लू सुरक्षा के मार्जिन को परिभाषित करते हुए कहते हैं, "अगर आपकी संपत्ति या एसेट की क्वालिटी बहुत ऊंची है, तो आपके एसेट की मांग कम होगी। आपको इस ये बात पता होनी चाहिए कि ये एसेट आपको क्या दे सकते हैं।" दूसरे शब्दों में, निवेशकों को व्यवसाय के उचित मूल्य को सही ढंग से निर्धारित करने के लिए एक अनोखी समझ की ज़रूरत होती है।